भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनावों के बीच, रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिका की ओर से मिले एफ-35 स्टील्थ फाइटर विमान के प्रस्ताव को भारत ने ठुकरा दिया है।
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F-35 |
दरअसल, अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% का टैरिफ लगाने के बाद, भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह एफ-35 खरीदने में रुचि नहीं रखता। यह ऑफर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान खुद पेश किया गया था।
भारत का फोकस अब पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि सरकार की प्राथमिकता स्वदेशी एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम पर टिकी है।
एफ-35 की कीमत लगभग 80 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट है और इसके रख-रखाव की लागत भी काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त, यह भारत के मौजूदा रूसी मूल के सैन्य अवसंरचना — जैसे IL-78 टैंकर और एयर कमांड सिस्टम — के साथ संगत नहीं है।
इस बीच रूस ने भारत को एक विशेष प्रस्ताव दिया है — भारत में Su-57 स्टील्थ फाइटर का सह-उत्पादन। इस प्रस्ताव में 60% से अधिक स्वदेशीकरण का वादा है और भारत की मिसाइल प्रणाली — जैसे 'अस्त्र मिसाइल' — को इसमें एकीकृत किया जा सकता है।
हालाँकि भारत ने अमेरिका से एफ-35 खरीदने से इंकार कर दिया है, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापारिक संतुलन बनाए रखने के लिए भारत अन्य क्षेत्रों में — जैसे गैस, दूरसंचार उपकरण, और सोने के आयात — में रुचि ले रहा है।
भारत अब ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है जो स्वदेशी तकनीक, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित होगा — एक ऐसा भविष्य जहाँ रक्षा क्षेत्र भी ‘मेक इन इंडिया’ की नींव पर टिकेगा।
